श्रम विभाजन का अर्थ है – किसी कार्य को छोटे-छोटे भागों में बाँट देना ताकि हर व्यक्ति विशेष कार्य में दक्षता प्राप्त कर सके। जाति प्रथा भारत की एक पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था है, जिसमें व्यक्ति का कार्य और सामाजिक स्थान उसकी जन्मजात जाति से निर्धारित होता है।Shram vibhajan aur jati pratha भीमराव अंबेडकर के द्वारा […]